” अति बुद्धिजीवी वर्ग: राष्ट्र की एक समस्या “

वर्तमान में राष्ट्रवाद और राष्ट्रघात के कोलाहल से नवीन बहस छिड़ी है | एक दूषित विचारधारा जिसने भारत में अपने स्थापनाकाल से ही सुनियोजित तरीके से  सामाजिक ताने बाने की गलत व्याख्या करके, सत्ता लोलुप वर्ग के संरक्षण में शैक्षिक पाठ्यक्रमों में दूषित तथ्यों की रचना करके वर्ग संघर्ष को जन्म दिया | ये बुद्धजीवी समस्या पर प्रश्न खड़ा करते हैं , किन्तु समस्या का कोई भी समाधान इनके पास नहीं है | इस विचारधारा का विश्लेषण करें तो आप पायेंगे कि यह सदैव सत्ता के संरक्षण में पल्लवित पोषित होते रहे हैं |

अपने पोषकों को सत्ता पर चिरस्थायी रखने के लिये सामाजिक –  सांस्कृतिक व्यवस्था में दोष मढ़कर वर्ग संघर्ष खड़ा करके राष्ट्रीय एकात्मता को नुकसान पहुँचाते हुये निरन्तर सत्ता प्राप्ति का मार्ग बनाते रहे | इस मार्ग पर चलकर सत्ता लोलुप वर्ग सत्ता पाता रहा है और ये सत्ताखोर बुद्धजीवी सत्ता की कृपा प्राप्त करके उपकृत होते रहे हैं |

 स्वजनो हमारा देश सांस्कृतिक , सामाजिक , भौगोलिक वैविध्य से परिपूरित है और इस वैविध्य को एक सूत्र में पिरोकर भारत का वैशिष्ट्य निर्मित करने का काम राष्ट्रीय एकात्मता करती है | हम एक सुर एक स्वर में गर्वोक्ति से कहते हैं कि हम भारतीय हैं | यह बोध ही राष्ट्रवाद है | इस बोध को नष्ट करने की चेष्टा ही राष्ट्रघात है | अभिव्यक्ति की आजादी हमें व्यक्ति , व्यवस्था की आलोचना का अधिकार और नवीन सुझाव देने का सामर्थ्य देती है किन्तु जब अभिव्यक्ति के नाम पर राष्ट्र की एकात्मता को नष्ट करने की चेष्टा की जाती है तो उसके मुखर विरोध के स्वर स्वाभाविक है | यह मुखर विरोध जनसामान्य की सहज अभिव्यक्ति है और राष्ट्रघातियों के लिये स्पष्ट चेतावनी है | ये राष्ट्रघाती कोई भी हों उनका मुखर और व्यापक विरोध होना स्वाभाविक ही है | यह विरोध किसी विचार से प्रेरित नहीं बल्कि राष्ट्रवंदना के चिरस्थायी भाव का हमारे रक्त में सम्मिलित होने का द्योतक है |

मैं राष्ट्र की एकात्मता और अखण्डता के साथ हूँ | और इस विचार को जीने वाले सभी के साथ खड़ा हूँ|

वन्देमातरम

भारतमाताकीजय
जयअखंडभारत

आलोक कुमार पाण्डेय
शोध एवं नीति विषयक विभाग
भाजपा उत्तर प्रदेश
9450223220

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