#देश पर भारी #नफ़रत की #कासगंज कहानी..! 

तिरंगा फहरेगा.. जश्न मनेगा… 
ये उन दिनों की बात है जब #कासगंज शांत था, 25 जनवरी की रात कासगंज की सड़कों पर वही माहौल था, लोग घर जा रहे थे, खरीददारी कर रहे थे, तिरंगों से सजा बाजार हर एक के मन में #देशभक्ति उड़ेल रहा होगा..बच्चे 26 जनवरी मनाने के लिए दुकानों से तिरंगा खरीद रहे होंगे, और चंदन ने भी 26 जनवरी की तैयारी जोर शोर से की होगी, तिरंगा खरीदा होगा.. सबको बताया होगा.. हम तिरंगा यात्रा करेंगे… और जैसे ही 26 जनवरी आई, उसी दिन #राजपथ पर #भारत की #शान को देश के कुछ गद्दारों ने कासगंज में धूमिल कर दिया, #शौर्य गाथा की जगह कासगंज के नाम पर #कलंक गाथा लिख दी..

#तिरंगा #यात्रा में शामिल चंदन को मार दिया गया… और इसी के साथ कासगंज में फैली #हिंसा की चपेट में झुलस गया #गणतंत्र, राख हो गया #संविधान, हवा में उड़ गया #भाईचारा… देश के नाम पर एक होने के दावे करने वाले मज़हब के नाम पर लड़ गए… अब #सवाल है.. आखिर किसने रोका था तिरंगा यात्रा को..? आखिर किसने तिरंगा यात्रा में ढूंढ लिया मजहब ? और सबसे #अहम बात ये कि अगर किसी बात को लेकर गणतंत्र के दिन विवाद हुआ भी… तो अचानक #तेज़ाब की बोतलें कहां से आ गईं ? अचानक #फायरिंग कहां से होने लगी..? #गोलियां कहां से चलने लगीं..? क्या गणतंत्र दिवस की शान को बचाया नहीं जा सकता था…? क्या उस पूरे इलाके में कोई #अमनपसंद नहीं था.? क्या किसी को देश के उस संविधान का ध्यान नहीं था जिसका #हिंदुस्तान के गौरव से सीधा संबंध है..? लड़ गए, यात्रा करने वालों को दौड़ा दिया गया.. तिरंगे के सामने तिरंगे को #नंगा कर दिया गया.. बिल्कुल नहीं सोचा गया आगे क्या होगा, और देखिए संविधान दिवस से अब तक कासगंज #सुलग रहा है… #नफ़रत और #दहशत के बीच झूल रहा है… #देशभक्ति की बात बस चुभ सी जाती है, समझ नहीं आता तिरंगा यात्रा करना इतना भारी कैसे पड़ सकता है..! इस सुलगते कासगंज के #गुनहगार कौन हैं..? उनको अब जल्दी सामने लाने की ज़रूरत है… कासगंज राजनीतिक_साजिश का शिकार हुआ है क्या..? ये भी जानने की ज़रूरत है कि आखिर वो कौन लोग हैं जिन्हें तिरंगे से ऐतराज़ है ? #एलआईयू अपना काम नहीं कर पाई… लेकिन कानून को अपना काम जल्द और ईमानदारी से करना होगा।

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