युवाओं की क्षमताओं को सामने लाने के लिए एक मंच पर आए नीति आयोग और यूनिसेफ

नई दिल्ली, भारत की युवा जनसंख्याखासतौर पर हाशिए पर रहने वाले समूहों के लिए सामाजिक-आर्थिक अवसरों के विस्तार हेतु नीति आयोग तथा यूनिसेफ इंडिया ने समर्पित हितधारकों को साथ लेते हुए एक राष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया हैजिसे युवानाम दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा  में 2030 तक हर युवा को गुणवत्ता आधारित शिक्षाट्रेनिंग और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए शुरू किए गए वैश्विक कार्यक्रम “जेनरेशन अनलिमिटेड से प्रभावित होकर भारत में युवा की पहल की गई है।

यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरीएटा फोर ने नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के साथ भारत में रह रही 25.3 करोड़ मजबूत किशोर जनसंख्या की आकांक्षाओं और अवसरों की प्राप्ति की दिशा में सहयोग के लिए शिक्षाकौशल विकास और रोजगार/ उद्यमिता पारिस्थितिक तंत्र में सक्रिय प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लेकर आए।

हाल ही में यूनिसेफ स्पेशल रेप्रेजेंटेटिव आफ यंग पीपल नियुक्त किए गए माइक्रोसाफ्ट इंडिया तथा कुमिंस के पूर्व चेयरमैन रवि वेंकटेशनयूनिसेफ तथा नीति आयोग के इस पहल का नेतृत्व करेंगे। उनका बल युवाओं के लिए नए अवसरों की तलाशइसके लिए जरूरी साझेदारी तथा नवाचार विकसित करने की दिशा में काम करने पर होगा।

युवा भारत सरकारराज्य सरकारोंप्राइवेट सेक्टरसिविल सोसाइटी आर्गेनाइजेशंसयूएन एजेंसीजसपोर्टिंग पार्टनर्ससाल्युशन पार्टनर्सएजुकेटर्स और किशोरों को एक मंच पर लेकर आया है।

इस राष्ट्रीय साझेदारी का लक्ष्य 10 से 24 साल के बीच के युवाओं (खासतौर पर समाज के सबसे कमजोर वर्ग के) के लिए विशेष कार्य क्षमताओं और आर्थिक अवसरों का विकास करना है और इसी को ध्यान में रखते हुए इससे जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित किया गया।

अपने तरह की इस पहली पहल के तहत यह साझेदारी युवाओं की आवाज को सुननेउनके नए विचारों और उनकी आकांक्षाओं को जानने के लिए एक मैकेनिज्म प्रदान करेगी। इसका लक्ष्य युवा लोगों के साथ सह-निर्माण समाधान बनाने और लिंग उत्तरदायी समाधान बनाने के लिए सबूत इकट्ठा करना है।

इस राष्ट्रीय सम्मेलन से पहले यूनिसेफ और उसके साझेदारों ने छह राज्य स्तरीय विमर्श कार्यशाला का आयोजन किया गयाजहां साल्यूशन प्रोवाइजर्सप्राइवेट सेक्टर और सरकारी प्रतिनिधि युवाओं की बातों को सुनने और उनके द्वारा सामने रखी गई चुनौतियों और आकांक्षाओं को समझने और उनका समाधान निकालने का प्रयास किया गया। इन कार्यशालाओं में समाज के सबसे कमजोर वर्ग पर विशेष बल दिया गया।

सम्मेलन में हिस्सा ले रही दिल्ली के एक युवा विभु शर्मा ने कहा, हमारे बिनाहमारे लिए कुछ भी नहीं है। हम युवा अपने भविष्य के लिए उत्तरदायी हैं। हम अपनी चुनौतियों को समझते है और यही कारण है कि हमें शिक्षाकौशल और रोजगार से जुड़े अपने सामान्य लक्ष्यों का रास्ता निकालना होगा।

युवा एक दीर्घकालीन रणनीतिक साझेदारी पर आधारित पहल है। इसका लक्ष्य शिक्षा (वैकल्पिक व लचीले शैक्षणिक पाठ्यक्रम के साथ)जीवनरोजगारपरक कौशलकरियर गाइडेंस और रोजगार (उद्यमिता के साथ) से जुड़े अवसर बनाने के लिए निरंतर और समन्वित निवेश को बढ़ावा देना है। इस पहल के केंद्र में स्कूलों में बढ़ रहे 2.5 करोड़ बच्चे और किशोरस्कूलो से बाहर हो चुके 2 करोड़ बच्चे और संस्थानों में बढ़ रहे 40 लाख बच्चे हैं।

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा, “हमें भारत में उद्यमिता भावना का विकास करना होगा। खासतौर पर हमें महिलाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित करना होगा। हमारे विकास के लिए लैंगिक समानता बहुत जरूरी है। अगले तीन साल में हम 50 करोड़ नवाचार प्रयोगशालाओं को समर्थन देने जा रहे हैं। हम भारत में उद्यमिता भावना को सामने लाना चाहते हैं।

भारत में मौजूदा समय में 48 करोड़ कार्यबल हैजिसमें से 93 फीसदी (44.6 करोड़) छोटे तथा अनौपचारिक क्षेत्र के उपक्रमों में कार्यरत है। 60 फीसदी (28.8 करोड़) से अधिक ग्रामीण भारत में रोजगार पाता है। इसके अतिरिक्त भारत के 90 फीसदी कार्यबल को कभी कोई कौशल सम्बंधी प्रशिक्षण नहीं मिला। अगले 20 साल में भारत में बच्चों की कुल आबादी (44.4 करोड़) काम करने की आयु में आ जाएगी। ऐसे  में भारत के सामने इन युवाओं को काम करने के लिए जरूरी प्रशिक्षण और कौशल विकास से लैस करने की चुनौती है।

युवा इसी दिशा में काम करने के लिए शुरू किया गया पहल है। यह साझेदारों के साथ मिलकर युवाओं के लिए बेहतर शिक्षाकौशलअच्छी नौकरियों और स्थायित्व जीवनशैली के लिए जरूरी उपायों पर काम करने के लिए हितधारकों को एक मंच पर लेकर आया है। ये हितधारक इस पहल के तहत सभी लोगों को उपलब्ध होने वाली सुविधाओं की पहचान करनेउनके लिए तंत्र बनाने और उन्हें लागू करने की दिशा में काम करेंगे।

युवाओं के साथ अपने विचार साझा करने के बाद सुश्री फोर ने कहा, “भारत में बाल मृत्यु दर में काफी कमी आई है और प्राथमिक शिक्षा के लिए स्कूलों का रुख करने वाले बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है लेकिन इसके बावजूद भारत में लाखों एसे बच्चे हैंजिन्हें उनके जीवन के दूसरे दशक में किसी प्रकार का समर्थन और सहयोग नहीं मिल पा रहा है। लड़कियोंप्रवासियोंबच्चोंदिव्यांगों और एतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के मामले में यह बात बिल्कुल सच है।

इसके अलावा सुश्री फोर ने भारत में तीन बड़े अवसरों की भी पहचान की। इनमें 1. लचीली शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देनासामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों का विस्तार करनाऔर 3. अन्य युवा लोगों का समर्थन करने वाले युवा लोगों का समर्थन करना शामिल हैं।

इस कार्यक्रम में 60 से अधिक किशोरों और युवाओ (देश में सबसे अधिक हाशिए पर जी रहे समूहों से भी) के अलावा कौशल विकास एवं उद्यमिता सचिव श्री केपी कृष्णनस्कूली शिक्षा एवं साक्षरता सचिव सुश्री रीना रेयुवा एवं खेल मामलों के मंत्रालय के सचिव अमरेंद्र कुमार दुबेप्राइवेट सेक्टरयूएन एजेंसीजसिविल सोसाइजी आर्गेनाइजेशंस के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

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