राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा सर्पदंश से बचाव हेतु गाइडलाइन जारी
Date posted: 2 July 2020
लखनऊः उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण द्वारा सर्पदंश से बचाव के सम्बन्ध में आवश्यक गाइडलाइन तैयार की गयी है। इस गाइडलाइन में जनहानि को न्यूनतम करने के करने लिए प्राथमिक उपाय के रूप में आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये हंै। प्रदेश के जनमानस को सर्पदंश से बचने के उपायों के प्रति प्राधिकरण द्वारा शीघ्र ही एक जागरूकता अभियान भी चलाया जायेगा।
यह जानकारी उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल रविन्द्र प्रताप शाही, एवीएसएम ने आज यहां दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने राज्य में सर्पदंश को आपदा की श्रेणी में अधिसूचित किया है। विगत कुछ वर्षो में बाढ़ के अतिरिक्त सर्पदंश एक विभीषक आपदा का रूप ग्रहण कर चुकी है। उन्होंने बताया कि सर्पदंश अचानक घटित होने वाली ऐसी घटना है, जिसे आवश्यक सावधानियों का पालन करते हुए टाला जा सकता है। सर्पदंश के कारण होने वाली जनहानि के शमन हेतु आवश्यक है कि इस सम्बन्ध मंे अधिक से अधिक जानकारी लोगों को मिल सकें।
श्री शाही ने बताया कि गाइडलाइन में साँप के काटने पर क्या करें-क्या न करें के सम्बन्ध मेें विस्तार से उल्लेख किया गया है। बरसात के मौसम में बाहर निकलते समय बूट, मोटे कपड़े का पैन्ट इत्यादि पहनें, नशा न करें, क्योंकि इससे खतरे को समझने की क्षमता कम होती है। सांप दिखने पर पास न जाये एवं उसे मारने की कोशिश न करें। उसे बचकर जाने दें। सर्पदंश पर घबराये नहीं। आराम से लेट जाये, काटे हुये भाग को हृदय के स्तर से थोड़ा नीचे रखे। कपड़े ढीले कर दें, चूडी, कड़े, घड़ी अंगूठी जैसे आभूषण निकाल दें। छोटे बच्चे, वृद्ध और अन्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों में जहर का असर गम्भीर हो सकता है, इसमें विशेष ध्यान रखे जाने की आवश्यकता है।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने बताया कि इसके उपचार मंे देरी न की जाए। घाव के साथ छेड़-छाड़ न करें। घाव के काटने, चूसने बर्फ लगाने, कसकर बांधने, देसी दवा अथवा केमिकल इत्यादि लगाने का कोई स्पष्ट लाभ नहीं होता है, अपितु घाव मंे नुकसान हो सकता है एवं जहर शरीर में ज्यादा तेजी से फैल सकता है। घबराने, दौड़ने भागने इत्यादि से जहर तेजी से शरीर में फैलता है। व्यक्ति को मदिरा, नशे की कोई चीज तथा कैफीनेटेड ड्रिंक्स न दी जाए। दर्द के लिये सिर्फ पैरासीटामाॅल दिया जाए। झांड-फंूक इत्यादि से बचा जाए। रोगी को जिला अस्पताल/सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र अथवा प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र/अस्पताल ले जाया जाए और चिकित्सक की सलाह के अनुसार पीड़ित का उपचार सुनिश्चित करें।
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