प्राइवेट स्कूलों के लिए दिल्ली सरकार के जारी निर्देश भी अन्य निर्देशों की तरह दिखावटी

नई दिल्ली:  दिल्ली के कई प्राइवेट स्कूलों ने कोरोना लॉकडाउन के बीच फीस का भुगतान नहीं करने वाले छात्रों को ऑनलाइन क्लास देने से मना कर रहे हैं। कुछ स्कूलों ने तो पहले से ही ऑनलाइन क्लासेस से छात्रों के नाम हटा दिए हैं जबकि कुछ ने नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि यदि फीस नहीं दी तो बच्चों को ऑनलाइन क्लास नहीं दी जाएगी।

इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि कई प्रमुख प्राइवेट स्कूल है जिन्होंने फीस न जमा होने के कारण ऑनलाइन क्लास से बच्चों का नाम काट दिया है और उनके अभिभावकों को व्हाट्सएप ग्रुप से भी निकाल दिया है जिसकी शिकायत स्वयं अभिभावकों ने दी है। दिल्ली सरकार को प्राइवेट स्कूलों की मनमानी क्यों नहीं दिख रही है? इस अनदेखी से तो साफ जाहिर है कि दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को अपनी मनमानी करने की छूट दे रखी है।
श्री गुप्ता ने कहा कि पहले भी शिक्षा निदेशालय ने बीते 30 अगस्त को दिल्ली के सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिया था कि वे उन छात्रों को ऑनलाइन कक्षाओं में प्रवेश से मना न करें जिनके माता-पिता कुछ कारणवश लॉकडाउन के दौरान फीस का भुगतान करने में असमर्थ थे। लेकिन निर्देशों के बावजूद प्राइवेट स्कूल ट्यूशन फीस के साथ-साथ अन्य फीस की मांग रखी। उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूलों के लिए दिल्ली सरकार द्वारा जारी किया गया निर्देश भी अन्य निर्देशों की तरह दिखावटी है। यह आदेश दिल्ली के लोगों को दिखाने के लिए है कि दिल्ली सरकार उनकी समस्याओं का समाधान कर रही है लेकिन वास्तविकता में दिल्ली सरकार प्राइवेट स्कूलों के साथ मिलीभगत कर अपनी जेब भरने में लगी है। बच्चों की शिक्षा और उनके अभिभावकों की आर्थिक स्थिति से दिल्ली सरकार का कोई सरोकार नहीं है इसलिए दिल्ली सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का क्रियान्वयन धरातल पर नहीं होता है।
श्री गुप्ता ने कहा कि शिक्षा मॉडल के कसीदे पढ़ने वाले मुख्यमंत्री केजरीवाल बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंतित नहीं है क्योंकि कई बार उन्हें इस समस्या से अवगत कराया गया लेकिन मुख्यमंत्री केजरीवाल ने गंभीरता से इस ओर कोई कदम नहीं उठाया। केजरीवाल सरकार निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने में हमेशा से ही नाकाम रही है। निजी स्कूलों पर केजरीवाल सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। महामारी के दौर में केजरीवाल सरकार से राहत दी जाने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि केजरीवाल सरकार निजी स्कूलों को शह दे रही है। दिल्ली भाजपा यह मांग करती हैं कि दिल्ली सरकार तत्काल प्रभाव से प्राइवेट स्कूलों की बढ़ती मनमानी पर अंकुश लगाएं और स्कूलों को निर्देशित करें कि वह अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए समय दें। फीस के कारण बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना जायज नहीं है।

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