परिवार को ही पार्टी समझते हैं कांग्रेसी: राजीव रंजन

पटना: कांग्रेस को परिवारवाद का सबसे बड़ा प्रतीक बताते हुए भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने कहा “ कांग्रेस की कल हुई कार्यसमिति में एक बार फिर यह साबित हो गया है कि यह पार्टी कभी भी वंशवाद का दामन नहीं छोड़ सकती है. सोमवार की सुबह अध्यक्ष पद से सोनिया गांधी के इस्तीफे की पेशकश और पार्टी में बदलाव की बड़ी बड़ी बातें शाम होते होते सिर्फ एक दिखावा साबित हुईं. सात घंटे के मंथन के बाद भी कांग्रेस परिवारवाद के पंजे से बाहर नहीं निकल पाई. कांग्रेस में उठा तूफान फिलहाल कुछ वक्त के लिए थम सा गया है. लेकिन जिस तरह कांग्रेस के बड़े नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी और उस पर राहुल गांधी ने जो प्रतिक्रिया दीउससे कांग्रेस के भीतर चल रही महाभारत’ खुलकर सामने आ चुकी है”.

श्री रंजन ने कहा “अधिकांश कांग्रेसियों के लिए गाँधी परिवार ही कांग्रेस है. पार्टी पर इन्हीं लोगों का कब्ज़ा है और जो भी इनके लाइन से अलग पार्टी हित की बात करता है, उसे यह गुट भाजपा समर्थक या गद्दार घोषित करने लगता है. याद करें तो 15 दिन पहले कांग्रेस के 23 बड़े नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी जिसमें कांग्रेस में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव करने और कांग्रेस के पूर्णकालिक अध्यक्ष का चुनाव करने की मांग की गई थी. इस चिट्ठी को लिखने वाले कोई छोटे नेता नहीं बल्कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजादकपिल सिब्बलशशि थरूरमनीष तिवारी सरीखे नेता शामिल है. लेकिन इन नेताओं का पार्टी हित में चिट्ठी लिखना राहुल गांधी को इतना नागवार गुजरा की उन्होंने अपनी ही पार्टी के इन 23 नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और यहां तक कह दिया कि ये नेता बीजेपी के साथ मिले हुए हैं.”

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा “ इन नेताओं के खिलाफ राहुल जी का यह रवैया दिखाता है कि कांग्रेस में पार्टी के लिए जीवन समर्पित करने वाले नेताओं की कोई हैसियत नहीं. जो भी पार्टी हित की बात करता है, गाँधी परिवार उन्हें अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ता. राहुल के इस रवैए से कांग्रेस का भला चाहने वाले नेता अंदर ही अंदर उबल रहे हैं. आने वाले समय में कांग्रेस अगर दो फाड़ हो जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा.”     

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