मोदी के नेतृत्व में अमित शाह के प्रयासों से दिल्ली में बेड की कोई कमी नहीं है: आदेश गुप्ता

नई दिल्ली: दिल्ली की ध्वस्त होती स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और बेड की कमी को देखते हुए मोदी सरकार के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली में रेलवे कोच को आइसोलेशन सेंटर में तब्दील किया गया। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता, सांसद गौतम गंभीर व विधायक ओम प्रकाश शर्मा ने आज आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर लगे रेलवे कोच में बने आइसोलेशन सेंटर का दौरा किया। इस अवसर पर प्रदेश प्रवक्ता नवीन कुमार, जिला अध्यक्ष राम किशोर शर्मा, निगम पार्षद गुंजन गुप्ता उपस्थित थीं।

आदेश गुप्ता ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्री अमित शाह जी के प्रयासों से आज दिल्ली में बेड की कोई कमी नहीं है। मोदी सरकार ने बेड की कमी को दूर करने के लिए रेलवे कोच को सभी जरूरी उपकरणों से लैस आइसोलेशन सेंटर में तब्दील कर दिया। उन्होंने बताया कि आनंद विहार स्टेशन पर 264 ट्रेन कोच में 4272 बेड है, प्रत्येक बोगी में ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था है और साथ ही मरीजों की देखरेख के लिए डॉक्टर भी तैनात है। इस आइसोलेशन सेंटर को दिल्ली सरकार को सौंपा गया है।

श्री गुप्ता ने कहा कि अप्रैल में ही मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उन्होंने 30,000 बेड की व्यवस्था की है लेकिन कुछ दिनों पहले ही उन्होंने स्वीकार किया है कि बेड की कमी का कारण दिल्ली में कोरोना से मृत्यु के आंकड़े बढ़े। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने खुद ही अपने दावों को खोखला साबित कर दिया कि उन्होंने 24 मार्च से 14 जून तक, इन 83 दिनों में उन्होंने पर्याप्त बेड की व्यवस्था नहीं की। वहीं मोदी सरकार के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली में 30,000 बेड की व्यवस्था की गई है, प्राइवेट अस्पतालों की प्राइस कैपिंग भी की गई, टेस्टिंग रेट को भी आधा किया गया, टेस्टिंग सेंटर पर रैपिड एंटीजन टेस्टिंग की जा रही है, कंटेनमेंट जोन में ट्रेसिंग का काम लगातार जारी है।

गुप्ता ने कहा कि अब दिल्ली में सेरोलॉजिकल सर्वे भी शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि अप्रैल में ही इन एम्स ने दिल्ली की स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखकर सेरोलॉजिकल सर्वे शुरू कराने का आग्रह किया था लेकिन पूरे लॉकडाउन की अवधि में दिल्ली सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अगर इस आग्रह को दिल्ली सरकार पहले ही मान लेती तो आज दिल्ली की स्थिति कुछ और होती। उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर वादे तो बड़े-बड़े किए थे लेकिन जब उसे धरातल पर लागू करने का समय आया तो जमीन पर न ही उनकी व्यवस्था दिखी और न ही कभी स्वयं मुख्यमंत्री केजरीवाल।

केजरीवाल सरकार और उनके मंत्री को घेरते हुए श्री गंभीर ने कहा कि आज दिल्ली के लोगों को भी पता है कि दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने के लिए 14 जून के बाद से माननीय गृह मंत्री जी ने काम किया है न की केजरीवाल सरकार ने। अगर केजरीवाल सरकार को क्रेडिट लेने का इतना ही शौक है तो उन्हें दिल्ली के लोगों के लिए बेड, टेस्टिंग, इलाज एवं अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को 14 जून से पहले ही मुहैया कराना चाहिए था। लेकिन केजरीवाल सरकार ने ऐसा नहीं किया क्योंकि वह तो प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यस्त थे और दिल्ली के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में कोरोना संक्रमण से मर रहे थे। दिल्ली की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री केजरीवाल की थी जो वह संभाल नहीं पाए इसीलिए माननीय गृह मंत्री जी ने स्वयं हस्तक्षेप किया और दिल्ली में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक निर्णय लिए और उन निर्णय को लागू भी करवाया। परिणाम स्वरूप आज दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले नियंत्रित हैं।

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