हजारों लोगों ने आपातकाल और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ सत्याग्रह किया: ओम प्रकाश कोहली
Date posted: 26 June 2020
नई दिल्ली: आज से 45 साल पहले यानी 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार की सिफारिश पर भारतीय देश में आपातकाल की घोषणा की थी। आपातकाल की घोषणा कर कांग्रेस ने भारतीय राजनीति के इतिहास का काला अध्याय लिखा। आपातकाल के दौरान भारत के लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिन सेनानियों ने संघर्ष किया और यातनाएं सही उन्हें नमन करते हुए दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि उनका यह त्याग और बलिदान देश कभी नहीं भूलेगा। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व दिल्ली प्रभारी श्याम जाजू, गुजरात के पूर्व राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली, नेता प्रतिपक्ष रामवीर बिधूड़ी, दिल्ली भाजपा पूर्व अध्यक्ष व विधायक विजेंद्र गुप्ता, प्रदेश संगठन महामंत्री सिद्धार्थन सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में हिस्सा लिया।
श्री गुप्ता ने कहा कि इस आपातकाल के लिए एक सोचा समझा षड्यंत्र रचा गया था, घोषणा पत्र पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से पहले, जेपी नारायण जी, मोरारजी देसाई जी, एल.के. अडवानी जी और अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं के साथ सैकड़ों अन्य लोगों को रातों रात जेल में डाल दिया गया था। यह समय स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे विवादस्पद काल था। चुनाव स्थगित हो गए थे, विरोध में उठ रहीं आवाजों को दबा दिया गया था, नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों से वांछित कर दिया गया था और पूरे देश को एक बड़े जेलखाने में बदल दिया गया था। जबरन नसबंदी जैसी गतिविधियों ने पूरे देश में एक डर और आतंक की लहर पैदा कर दी थी और कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।
आपातकाल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अहम भूमिका का जिक्र करते हुए गुप्ता ने बताया कि आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता छीनी जा चुकी थी और कई पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया गया था। सरकार की कोशिश थी कि लोगों तक सही जानकारी नहीं पहुंचे। उस कठिन समय में भी नरेंद्र मोदी और आरएसएस के प्रचारकों ने सूचना के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी उठाई और देश के लोगों तक सही जानकारी पहुंचाई। 70 साल के राज में कांग्रेस सरकार ने देश की नींव को ही खोखला कर दिया था, भ्रष्टाचार को सिस्टम के कोने-कोने में व्यापक बना दिया था और आज भी देश की छवि को बिगाड़ने की पूरी कोशिश करते रहते हैं। लेकिन ये रेंद्र मोदी का कुशल नेतृत्व ही है जिसने कांग्रेस मुक्त भारत, भ्रष्टाचार मुक्त भारत की नींव रखी और इस दिशा में कार्य करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
ओम प्रकाश कोहली ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को रायबरेली के चुनाव अभियान में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का दोषी पाया था और उनके चुनाव को खारिज कर दिया था। इतना ही नहीं, इंदिरा गांधी पर छह साल तक चुनाव लड़ने पर और किसी भी तरह के पद संभालने पर रोक भी लगा दी गई थी। लेकिन इंदिरा गांधी अपना पद छोड़ने के बिल्कुल पक्ष में नहीं थी। परिणाम स्वरूप कांग्रेस ने देश में आपातकाल लागू करने का फैसला लिया और आधी रात में ही इंदिरा गांधी ने तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद से आपाताकाल के फैसले पर दस्तखत करवा लिया। हजारों लोगों ने आपातकाल के खिलाफ और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ सत्याग्रह किया। राष्ट्र नेताओं के नेतृत्व में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया जो निर्णायक मुकाम तक पहुंची और इंदिरा गांधी को सिंहासन छोड़ना पड़ा।
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