September 28, 2026 | 04:02:49
प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण आजीविका संवर्धन, महिला सशक्तीकरण और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संचालित पशुधन विकास कार्यक्रम जमीनी स्तर पर व्यापक परिवर्तन ला रहे हैं। विशेष रूप से लघु एवं सीमांत कृषकों तथा भूमिहीन परिवारों के लिए पशुपालन विभाग की बकरी पालन योजना आर्थिक संबल और स्थायी स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम सिद्ध हो रही है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक खेती पर निर्भर परिवारों को बहुआयामी आय स्रोतों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
जनपद मुरादाबाद के विकासखंड बिलारी स्थित ग्राम भिडवारी की निवासी अतरीबी की सफलता की कहानी इस परिवर्तन का जीवंत उदाहरण है। सामान्य रूप से शिक्षित अतरीबी का परिवार अत्यंत सीमित कृषि भूमि पर निर्भर था, जिससे परिवार का भरण-पोषण और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति एक निरंतर चुनौती बनी रहती थी। परंपरागत खेती से सीमित आय के कारण वे वैकल्पिक आजीविका की तलाश में थीं, जिसे जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन ने नई दिशा प्रदान की।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिला प्रशासन के सहयोग से पशुपालन विभाग की बकरी पालन योजना के तहत अतरीबी का चयन किया गया। योजना की संरचना के अनुरूप कुल रू0 45,000 की इकाई लागत निर्धारित की गई, जिसमें कमजोर आर्थिक वर्ग को संबल देने के लिए 90 प्रतिशत शासकीय अनुदान के रूप में रू0 40,500 की धनराशि स्वीकृत की गई। लाभार्थी अंश के रूप में मात्र 10 प्रतिशत यानी रू0 4,500 का योगदान लेकर उन्हें 05 उन्नत नस्ल की बकरियां एवं 01 नर बकरा उपलब्ध कराया गया।
पशुधन की सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रबंधन को योजना का अभिन्न अंग बनाया गया। वितरण के तुरंत बाद सभी पशुओं का शत-प्रतिशत बीमा कराया गया, जिससे किसी भी अनहोनी की स्थिति में आर्थिक जोखिम समाप्त हो गया। इसके साथ ही पशुपालन विभाग द्वारा समय-समय पर निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, आवश्यक कृमिनाशक दवाएं और संक्रामक रोगों से बचाव हेतु समयबद्ध टीकाकरण उपलब्ध कराया गया। विभागीय निगरानी और उचित पोषण के कारण पशुओं की मृत्यु दर नगण्य रही।
अतरीबी ने विभागीय परामर्श के अनुसार वैज्ञानिक देखरेख, स्वच्छ आवास और संतुलित आहार प्रबंधन को अपनाया। उनकी कड़ी मेहनत और उचित संवर्धन का परिणाम रहा कि कुछ ही समय में उनकी 6 पशुओं की मूल इकाई बढ़कर वर्तमान में 28 बकरे-बकरियों के एक सुव्यवस्थित रेवड़ में तब्दील हो चुकी है। इस निरंतर वृद्धि ने न केवल परिवार की घरेलू आर्थिक जरूरतों को सहजता से पूरा किया, बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर एक सफल पशुपालक के रूप में स्थापित कर दिया।
आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ अतरीबी ने अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार करने का निर्णय लिया। उन्होंने पशुओं के सुरक्षित रखरखाव के लिए एक बड़ा और हवादार शेड तैयार किया तथा आय के स्रोतों में विविधता लाते हुए बकरी पालन के साथ-साथ बैकयार्ड मुर्गी पालन भी प्रारंभ कर दिया। इस समन्वित पशुधन मॉडल से परिवार को नियमित नकदी प्रवाह प्राप्त हो रहा है और ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार के अतिरिक्त अवसर भी सृजित हुए हैं।
अतरीबी का यह अनुभव प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के उन संयुक्त प्रयासों का परिणाम है, जिसके तहत राष्ट्रीय पशुधन मिशन और राज्य पोषित योजनाओं को पारदर्शिता के साथ लागू किया जा रहा है। योजनाओं में बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने और वास्तविक पात्रों तक लाभ पहुंचाने के लिए चयन से लेकर वित्तीय हस्तांतरण तक की संपूर्ण प्रक्रिया को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है।
पशुधन क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा लाभार्थियों को आधुनिक शेड निर्माण, चारा संरक्षण तकनीक, साइलेज निर्माण और नस्ल सुधार का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स के माध्यम से दूरदराज के गांवों में घर-घर तक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इस त्रिस्तरीय रणनीतिकृअनुदान, तकनीकी प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षाकृने ग्रामीण पशुपालकों में व्यावसायिक दृष्टिकोण विकसित किया है।
स्थानीय बाजारों में उच्च गुणवत्ता वाले मटन और पौष्टिक बकरी के दूध की सतत मांग के कारण पशुपालकों को तत्काल नकद आय प्राप्त हो रही है। कम पूंजी, सीमित स्थान और कम पानी की खपत के चलते बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए ’चलता-फिरता एटीएम’ सिद्ध हो रहा है। यह व्यवस्था प्रतिकूल मौसम या सूखे की स्थिति में भी लघु कृषकों के लिए एक अनिवार्य वित्तीय सुरक्षा कवच की भूमिका निभाती है।
प्रदेश सरकार आज अपनी तमाम योजनाओं माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य कर रही है। अतरीबी की यह विकास यात्रा प्रदेश के उन लाखों ग्रामीणों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर उन्नत पशुपालन के जरिए आत्मनिर्भरता की राह चुन रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करके खुशहाल जीवन शैली अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं।