अगले दो वर्षों में बुन्देलखण्ड में पाइप से पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित होगी-डा0 महेन्द्र सिंह

लखनऊ: दिनांक: 25 जनवरी, 2019 उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री ग्राम्य विकास (स्वतंत्र प्रभार) तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री डा0 महेन्द्र सिंह ने कहा है कि बुन्देलखण्ड के पेयजल के संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में अगले 02 वर्षों में पाइप से पेयजल सुलभ करा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि उ0प्र0 सरकार पिछले एक वर्ष के दौरान गर्मी के दिनों में बुन्देलखण्ड के हर घर को शुद्ध पीने का पानी पहुंचाने में सफल रही है। इसके साथ ही जेई/एईएस, आर्सेनिक व फ्लोराइड से प्रभावित क्षेत्रों में साफ पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
ग्राम्य विकास मंत्री आज जल निगम मुख्यालय स्थित ग्राम्य विकास विभाग उ0प्र0 के राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन द्वारा प्रयागराज कुम्भ मेला-2019 में पानी की जांच एवं प्रचार-प्रसार हेतु 29 वाहनों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किये जाने के अवसर पर सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उ0प्र0 में नदियों का एक जाल है और अन्य प्राकृतिक जलस्रोत हैं, जिसके कारण पानी की कोई कमी नहीं है। भूगर्भ जल तथा सतह के जल के समुचित सदुपयोग तथा संरक्षण के लिए लोगों में जागरूकता जरूरी है इसलिए प्रचार वाहनों को कुम्भ मेला में लगाया जा रहा है।
डा0 सिंह ने कहा कि प्रदेश के कुछ जटिल भौगोलिक क्षेत्रों में पेयजल की समस्या तथा कुछ क्षेत्र एईएस/जेई, फ्लोराइड तथा आर्सेनिक से प्रभावित हंै। शुद्ध पेयजल के आपूर्ति से इन क्षेत्रों में बीमारियों के प्रकोप पर काबू पाया गया है। राज्य सरकार इन संकटग्रस्त क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराकर जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि एलईडी से युक्त वाहनों के माध्यम से कुम्भ मेले में पधारने वाले विशाल जनसंख्या को जल संरक्षण में सहभागिता तथा समुचित उपयोग प्रति जागरूकता उत्पन्न करने में मदद मिलेगी।
ग्राम्य विकास मंत्री ने कहा कि वाटर टेस्टिंग लैब से युक्त 24 वाहन मेला क्षेत्र में पानी के नमूनों की जांच तथा उनकी रिपोर्ट उपलब्ध करायेंगे। इससे शुद्ध पेयजल के उपयोग सम्बन्धी संदेश प्रदेश तथा पूरे देश में पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि पहली बार कुम्भ मेले में इस तरह के वाटर टेस्टिंग लैब की व्यवस्था की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा जन स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता का इससे बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता। उन्होंने वाटर टेस्टिंग वाहनों तथा प्रचार वाहनों की अभिनव व्यवस्था के लिए अधिशासी निदेशक राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन की सराहना की।
उन्होंने कहा कि उ0प्र0 में 2384 बस्तियां जेई/एईएस, 10536 बस्तियां आर्सेनिक तथा 2411 बस्तियां फ्लोराइड से प्रभावित है। इन क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। जेई/एईएस से प्रभावित 762, आर्सेनिक से 815 तथा फ्लोराइड से प्रभावित 449 बस्तियों में शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा रहा है। शेष बस्तियों को शीघ्र ही अच्छादित कर लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पेयजल आपूर्ति के लिए विश्व बैंक से 1500 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत हुई थी।
उ0प्र0 सरकार ने विश्व बैंक की इस धनराशि को एक वर्ष में 500 करोड़ रुपये खर्च किया है और 1000 करोड़ रुपये की योजनाएं तैयार कर ली है तथा 149 परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष तक 2000 हजार करोड़ रुपये व्यय किये जाने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी क्षेत्रों में पाइप से पेयजल पहुंचाने का प्रयास कर रही है। कुछ क्षेत्रों में पाइप से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि शुद्ध पेयजल उपयोग के बदले यूजर चार्जेज जो 50 से 100 रुपये तक हो सकता है अवश्य भुगतान करें। इससे उपकरणों की मरम्मत, विद्युत देयों तथा अन्य व्यय को चुकाने में मद्द मिलेगी तथा पेयजल की निर्वाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास श्री अनुराग श्रीवास्तव, अधिशासी निदेशक राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन श्री सुरेन्द्र राम, विशेष सचिव ग्राम्य विकास श्री अच्छेलाल यादव, विशेष कार्याधिकारी डा0 हरिश चन्द्र, एम0डी0 जल निगम समेत ग्राम्य विकास के अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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