September 22, 2026 | 02:43:30
उन्नाव, इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए सिर्फ टेक्निकल नॉलेज और कोडिंग तक सीमित रहना अब काफी नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और डेटा जैसी तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इंडस्ट्री में काम करने के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश में नेशनल इंजीनियर्स डे 2026 के तहत एक्सपर्ट सेशन और ‘Hack2Innovate’ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में छात्रों ने साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी रियल वर्ल्ड समस्याओं पर काम करते हुए उनके तकनीकी समाधान तैयार किए। इसमें 20 से अधिक यूनिवर्सिटी के करीब 200 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
‘Hack2Innovate’ की शुरुआत 13 सितंबर को 10 घंटे के ऑनलाइन Capture the Flag (CTF) से हुई। प्रदर्शन और स्कोर के आधार पर लीडरबोर्ड से टॉप-20 टीमों का चयन किया गया। इन टीमों ने 14 सितंबर से कैंपस में आयोजित 24 घंटे के ग्रैंड फिनाले में हिस्सा लिया।
प्रतियोगिता के दौरान छात्रों को साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी कई चुनौतियां दी गईं। इनमें AI आधारित थ्रेट डिटेक्शन, API सिक्योरिटी, डेटा लीक डिटेक्शन, फेक और डीपफेक डिटेक्शन, डिजिटल फॉरेंसिक्स, एंड्रॉयड एप्लीकेशन सिक्योरिटी, वेयरेबल डिवाइस सिक्योरिटी और फेक सोशल मीडिया अकाउंट डिटेक्शन जैसे विषय शामिल रहे।
प्रतिभागी टीमों ने क्रिप्टोग्राफी, रिवर्स इंजीनियरिंग, क्लाउड और साइबर एक्सप्लॉइटेशन से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों पर भी काम किया। 24 घंटे का चैलेंज पूरा होने के बाद 15 सितंबर को हैकाथॉन का मूल्यांकन और प्रोटोटाइप पिचिंग हुई। टीमों ने इंडस्ट्री के जजों और अकादमिक रिसर्चर्स के सामने अपने तैयार किए गए सॉल्यूशन प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में DRDO की डायरेक्टर (सिग्नल) प्रियंका सिंह, IIT कानपुर के प्रो. डॉ. देबप्रिय बसु रॉय, एथर एनर्जी के को-फाउंडर स्वप्निल जैन, यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो के प्रो. यूर. इंग. डॉ. जोआओ पोंसियानो, यूनिवर्सिटी ऑफ मिलान के प्रो. पाओलो फ्रेवोलो और माइक्रोन टेक्नोलॉजी के गुरुशर सिंह ने इंजीनियरिंग, AI, ग्लोबल स्टैंडर्ड्स और इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों पर विचार साझा किए।
मुख्य अतिथि DRDO की डायरेक्टर (सिग्नल) प्रियंका सिंह ने कहा कि इंजीनियरिंग का उद्देश्य ऐसे समाधान तैयार करना है, जो लोगों के जीवन को आसान बनाने के साथ देश के विकास और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि छात्रों के पास आज ऐसे टूल्स और नॉलेज उपलब्ध हैं, जिनकी पिछली पीढ़ी के इंजीनियर केवल कल्पना कर सकते थे। उन्होंने छात्रों को परीक्षा पास करने के बजाय समस्याओं को समझने और समाधान तैयार करने पर ध्यान देने की सलाह दी।
यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो के डॉ. जोआओ पोंसियानो ने अकादमिक और इंजीनियरिंग स्टैंडर्ड्स के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर इंजीनियरों के बीच बेहतर सहयोग के लिए साझा मानकों और ओपन सिस्टम अप्रोच की जरूरत है। उन्होंने इंजीनियरिंग एथिक्स को भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
सीयूयूपी के मैनेजिंग डायरेक्टर जय इंदर सिंह संधू ने कहा कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश का प्रयास है कि इंजीनियरिंग छात्रों को क्लासरूम की पढ़ाई के साथ इंडस्ट्री की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि ‘Hack2Innovate’ जैसे प्लेटफॉर्म छात्रों को अपनी तकनीकी जानकारी, क्रिटिकल थिंकिंग और इनोवेशन को रियल वर्ल्ड समस्याओं पर लागू करने का अवसर देते हैं।
कार्यक्रम में सीयूयूपी के वाइस चांसलर प्रो. डॉ. विनीत नायर, प्रो-वाइस चांसलर प्रो. डॉ. टी.पी. सिंह समेत फैकल्टी मेंबर्स और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट सौम्या मुखोपाध्याय और निखिल तमिलनाडापल्ली ने भी छात्रों को साइबर सिक्योरिटी के व्यावहारिक पहलुओं से रूबरू कराया। सौम्या ने सिक्योरिटी कंसल्टिंग, रेड टीमिंग, वेब-API सिक्योरिटी और क्लाउड पेंटेस्टिंग पर जानकारी दी, जबकि निखिल ने थ्रेट रिसर्च, थ्रेट हंटिंग, मैलवेयर एनालिसिस और रिवर्स इंजीनियरिंग जैसे विषयों पर अनुभव साझा किया।
हैकाथॉन में कुल 2 लाख रुपये तक के पुरस्कार रखे गए हैं। आयोजन का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ना और उन्हें साइबर सिक्योरिटी तथा अन्य वास्तविक तकनीकी चुनौतियों के समाधान के लिए तैयार करना रहा।