September 25, 2026 | 04:25:28
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों में बेटियों और महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना इसी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। योजना न केवल विवाह के आर्थिक बोझ को कम कर रही है, बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक सम्मान के साथ अपनी बेटियों का विवाह संपन्न कराने का अवसर भी दे रही है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 5,71,963 जोड़ो का विवाह कराते हुए कल्याणकारी कार्य किये गये है।
समाज में सर्वधर्म-समभाव तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने हेतु राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना संचालित की है, जिसके अन्तर्गत विभिन्न समुदाय एवं धर्मों के रीति-रिवाजों के अनुसार वैवाहिक कार्यक्रम सम्पन्न कराया जाता है। योजना का यह भी उद्देश्य है कि विवाह उत्सव में होने वाले अनावश्यक प्रदर्शन एवं अपव्यय को समाप्त किया जाये।
रू० 3,00,000/- वार्षिक आय सीमा के अन्तर्गत आने वाले सभी वर्गों के परिवारों को इस योजनान्तर्गत आच्छादित किया जाता है। सभी वर्गों के जरूरतमंद, निराश्रित परिवारों के कन्याओं के विवाह हेतु सामूहिक आयोजन किया जाता है। योजनान्तर्गत विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा महिलाओं के विवाह की भी व्यवस्था है। आर्थिक अभाव किसी बेटी के विवाह में बाधा न बने और गरीब परिवार भी अपनी बेटियों का विवाह सम्मान और गरिमा के साथ कर सकें, इसी उद्देश्य को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना लगातार नए आयाम स्थापित कर रही है।
लाखों परिवारों को मिला योजना का सहारा
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के प्रति प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद परिवारों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक योजना के अंतर्गत 72,787 आवेदन प्राप्त हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के तहत विवाह कार्यक्रमों में तेजी आई है। अब तक प्रदेश में 17,758 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जा चुका है, जबकि पूरे वित्तीय वर्ष में 72,448 सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आवेदनों की जांच और पात्रता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया यह दर्शाती है कि प्रदेश सरकार इस योजना का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। सरकार का जोर केवल अधिक से अधिक विवाह कराने पर ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर भी है कि सरकारी सहायता सही लाभार्थी तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर अपात्र व्यक्ति इसका लाभ न उठा सके। प्रदेश सरकार के नेतृत्व मेें अब तक 5.72 लाख जोड़ो का विवाह सम्पन्न कराया गया है।
एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है कि प्रत्येक जोड़े को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसमें 64 हजार रुपये गृहस्थी बसाने, 21 हजार रुपये वैवाहिक उपहार सामग्री तथा 15 हजार रुपये विवाह समारोह की आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए निर्धारित हैं। यह सहायता गरीब परिवारों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक संबल साबित हो रही है। विवाह के बाद नवविवाहित दंपती को नई गृहस्थी शुरू करने में भी मदद मिलती है। इस प्रकार योजना केवल विवाह की औपचारिकता पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नवदंपती के जीवन की नई शुरुआत को आर्थिक आधार देने का भी प्रयास करती है।
तकनीक से मजबूत हो रही पारदर्शिता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की सरकार में जनकल्याणकारी योजनाओं को पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना भी इससे अछूती नहीं है। योजना में ई-केवाईसी के माध्यम से आवेदकों का सत्यापन किया जा रहा है। इसके साथ ही ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से आय और जाति प्रमाण पत्रों के डिजिटल सत्यापन की व्यवस्था प्रभावी की गई है। इससे पात्रता की जांच अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से हो रही है। शीघ्र ही आधार आधारित भुगतान व्यवस्था लागू किए जाने की तैयारी है। इसके लागू होने के बाद अनुदान की राशि पात्र लाभार्थी के आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई और लाभार्थी को सरकारी सहायता प्राप्त करने में अधिक सुविधा होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का संकल्प है कि आर्थिक अभाव किसी बेटी के सम्मानजनक विवाह में बाधा न बने। सरकार का प्रयास है कि योजना का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ वास्तविक और पात्र परिवारों तक पहुंचे तथा तकनीक के माध्यम से सत्यापन व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
महिला सशक्तीकरण की व्यापक नीति का हिस्सा
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को केवल विवाह सहायता की योजना के रूप में देखना इसके व्यापक सामाजिक उद्देश्य को सीमित करना होगा। यह योजना प्रदेश सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसके केंद्र में महिलाओं और बेटियों का सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता है। उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति जैसे अभियानों के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, उनकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया है। महिला स्वयं सहायता समूहों के विस्तार ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का रास्ता खोला है। बेटियों के लिए शिक्षा से लेकर कौशल विकास तक विभिन्न स्तरों पर किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य यही है कि बेटी को परिवार पर आर्थिक बोझ के रूप में नहीं, बल्कि विकास की सहभागी के रूप में देखा जाए।
गरीब परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार
प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का एक प्रमुख उद्देश्य समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने का अभियान हो, राशन की सुविधा हो, स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं हों या गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा और छात्रवृत्ति से संबंधित कार्यक्रम सरकार की नीतियों में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने पर जोर दिखाई देता है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर उभरी है। विवाह जैसे सामाजिक अवसर पर होने वाला खर्च गरीब परिवारों के लिए कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में सरकारी सहायता उन्हें आर्थिक दबाव से राहत देती है और बेटी के विवाह को सम्मानजनक तरीके से संपन्न कराने में मदद करती है।
विकास के साथ संवेदना का शासन
उत्तर प्रदेश में विकास की चर्चा अब केवल सड़कों, पुलों, निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। सरकार की नीतियों में सामाजिक कल्याण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास भी समान रूप से दिखाई देता है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना इसी विकास मॉडल का मानवीय पक्ष सामने लाती है। एक ओर प्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गरीब परिवारों की बुनियादी जरूरतों और सामाजिक जिम्मेदारियों में सरकार सहयोगी की भूमिका निभा रही है। बेटी के विवाह जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर सरकार यह संदेश दे रही है कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी है, जब उसका लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचे। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आज उत्तर प्रदेश में गरीब परिवारों के लिए आर्थिक सहायता से कहीं अधिक सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक संबल का माध्यम बनती जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की महिला-केंद्रित और गरीब कल्याण की नीतियों के बीच मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना एक ऐसी पहल के रूप में सामने आती है, जिसमें सरकार की संवेदना, तकनीक की पारदर्शिता और सामाजिक सम्मान तीनों का समन्वय दिखाई देता है। इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि यह हजारों परिवारों की आर्थिक चिंता को कम करने के साथ बेटियों के विवाह को सम्मान और गरिमा से जोड़ती है। यही कारण है कि योजना प्रदेश में सामाजिक कल्याण और सुशासन की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही है।