August 19, 2026 | 19:19:20
लखनऊ : प्रदेश सरकार द्वारा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, दैनिक वेतनभोगियों, निर्माण कामगारों तथा निराश्रित अनाथ बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित ‘अटल आवासीय विद्यालय योजना’ राज्यभर में सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का एक ऐतिहासिक आधार स्तंभ बनकर उभर रही है। आर्थिक रूप से कमजोर और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए लागू की गई यह महत्वाकांक्षी योजना वर्तमान समय में प्रदेश के ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी अंचलों में दूरगामी और सकारात्मक बदलाव की वाहक सिद्ध हो रही है। विशेष रूप से जनपद जौनपुर में इस योजना ने अभावों के बीच जीवन यापन कर रहे निर्धन परिवारों के नौनिहालों के जीवन में ज्ञान और आत्मनिर्भरता का नया सवेरा किया है।
जनपद जौनपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन यापन करने वाले असंगठित क्षेत्र के कामगार परिवारों के लिए अपने बच्चों को आधुनिक और उच्चस्तरीय शिक्षा दिलाना सदैव से एक मुश्किल कार्य रहा है। सीमित आमदनी, आजीविका के लिए निरंतर होने वाला भौगोलिक विस्थापन और पारिवारिक दायित्वों के बोझ के कारण इन परिवारों के प्रतिभावान बच्चे अक्सर उत्कृष्ट शैक्षणिक अवसरों से वंचित रह जाते थे। प्रदेश सरकार ने इस मूल समस्या की पहचान करते हुए केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रतिष्ठित नवोदय विद्यालयों और देश के ख्यातिलब्ध पब्लिक स्कूलों के मानकों के अनुरूप अटल आवासीय विद्यालयों की स्थापना की रूपरेखा तैयार की, ताकि अवसरों की असमानता को समाप्त किया जा सके।
योजना की सफलता का अत्यंत प्रेरक और स्पष्ट स्वरूप जनपद जौनपुर के शाहगंज क्षेत्र के ग्राम ताखा में देखने को मिलता है। यहाँ के निवासी श्याम सुंदर एक साधारण दिहाड़ी मजदूर हैं, जिनका संपूर्ण जीवन दैनिक मजदूरी के बल पर परिवार का भरण-पोषण करने में व्यतीत हो रहा था। सीमित और अनिश्चित आय के बावजूद वे अपनी चार पुत्रियों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने और उन्हें उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराने का संकल्प संजोए हुए थे। दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के संघर्ष के मध्य उच्च गुणवत्ता की स्कूली शिक्षा का व्यय वहन करना उनके लिए सर्वथा असंभव प्रतीत होता था।
श्याम सुंदर ने वर्ष 2014 में श्रम विभाग के अंतर्गत अपना पंजीकरण कराया था। श्रम विभाग से ही उन्हें प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिक संतानों के लिए संचालित अटल आवासीय विद्यालय योजना की जानकारी प्राप्त हुई, तो उन्होंने अपनी मेधावी पुत्री जाह्नवी का आवेदन कराया। जाह्नवी ने राज्य स्तर पर आयोजित पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षा में अपनी योग्यता सिद्ध करते हुए सफलता प्राप्त की और सत्र 2024-25 में अटल आवासीय विद्यालय में कक्षा 9 में प्रवेश प्राप्त किया।
विद्यालय परिसर में प्रवेश के उपरांत जाह्नवी को आवास, पौष्टिक एवं संतुलित खानपान, अत्याधुनिक शिक्षण सामग्री, यूनिफॉर्म तथा उत्कृष्ट शिक्षकों का मार्गदर्शन पूर्णतः निःशुल्क सुलभ कराया गया। इस अनुकूल शैक्षणिक परिवेश ने जाह्नवी के आत्मविश्वास को नई दिशा प्रदान की, जिसके फलस्वरूप उसने अपनी पढ़ाई पर पूर्ण ध्यान केंद्रित किया। उसकी अनवरत निष्ठा और शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का यह सुफल रहा कि उसने सत्र 2025-26 की हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में 91 प्रतिशत उत्कृष्ट अंक अर्जित कर अपने माता-पिता के साथ-साथ संपूर्ण जनपद जौनपुर का नाम रोशन किया। लाभार्थी के पिता का मानना है कि इस योजना के अभाव में आर्थिक विषमताओं के कारण उनकी पुत्री के लिए इतनी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि प्राप्त करना संभव नहीं था।
इसी क्रम में जनपद जौनपुर के विकास खंड सिकरारा अंतर्गत ग्राम पचोखर निवासी बुद्धिराम यादव का परिवार भी इस योजना के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हुआ है। बुद्धिराम यादव आजीविका के लिए टाइल्स मिस्त्री का श्रमसाध्य कार्य करते हैं। अपने श्रम के बल पर परिवार का पालन करते हुए वे सदैव अपने पुत्र वंशज को एक बेहतर शैक्षणिक पृष्ठभूमि देने के लिए प्रयासरत रहे। उन्होंने सत्र 2024-25 में अटल आवासीय विद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेकर अपने पुत्र का आवेदन कराया, जहाँ वंशज का चयन कक्षा 9 में अध्ययन हेतु हुआ।
अटल आवासीय विद्यालय के अनुशासित वातावरण, डिजिटल संसाधनों और शिक्षकों की व्यक्तिगत देखरेख में अध्ययन करते हुए वंशज ने अपनी प्रतिभा को सिद्ध किया। सत्र 2025-26 की हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में वंशज ने 87.4 प्रतिशत अंक हासिल कर यह प्रमाणित किया कि यदि वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को अनुकूल अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो वे उत्कृष्टता के नए प्रतिमान स्थापित कर सकते हैं। बुद्धिराम यादव का स्पष्ट मानना है कि विद्यालय की आधुनिक शिक्षण पद्धति, डिजिटल स्मार्ट कक्षाओं और सर्वांगीण विकास पर केंद्रित वातावरण ने उनके पुत्र के शैक्षणिक स्तर को नई ऊंचाई प्रदान की है।
अटल आवासीय विद्यालय योजना केवल श्रमिक परिवारों तक ही सीमित नहीं है, अपितु यह गंभीर पारिवारिक विपत्तियों का सामना कर रहे निराश्रित और अनाथ बच्चों के लिए भी एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। जनपद जौनपुर के विकास खंड सिरकोनी अंतर्गत ग्राम रमसापुर कबूलपुर की निवासी श्रीमती विद्योत्तमा देवी की आपबीती इस व्यवस्था की संवेदनशीलता को उजागर करती है। एक भीषण सड़क दुर्घटना में अपनी ज्येष्ठ पुत्री अर्चना और दामाद को असमय खो देने के बाद उनके अबोध नाती सावन कुमार के जीवन और शिक्षा पर गहरा संकट उत्पन्न हो गया था।
वृद्धावस्था और अत्यंत कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण विद्योत्तमा देवी अपने नाती के पालन-पोषण और भविष्य को लेकर निरंतर चिंतित रहती थीं। ऐसी विषम परिस्थितियों में प्रदेश सरकार की अटल आवासीय विद्यालय योजना उनके परिवार के लिए संबल बनी। सावन कुमार ने प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर अटल आवासीय विद्यालय, वाराणसी में कक्षा 9 में प्रवेश प्राप्त किया। वर्तमान में वह पूर्णतः सुरक्षित एवं शैक्षणिक रूप से समृद्ध वातावरण में अध्ययनरत है। विद्योत्तमा देवी का कहना है कि प्रदेश सरकार की इस पहल ने उनके अनाथ नाती के अंधकारमय भविष्य को सुरक्षित कर उसके जीवन में आशा और आत्मविश्वास का संचार किया है।
प्रदेश सरकार द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारभूत संरचना को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। राज्य के सभी 18 प्रशासनिक मंडलों में स्थापित प्रत्येक विद्यालय परिसर लगभग 12 से 15 एकड़ के विस्तृत भूभाग में फैला हुआ है। परिसरों का निर्माण विद्यार्थियों के मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक विकास को ध्यान में रखकर किया गया है। प्रत्येक विद्यालय की कुल क्षमता 1,000 विद्यार्थियों की निर्धारित की गई है, जिसमें लैंगिक समानता को प्राथमिकता देते हुए 500 बालकों और 500 बालिकाओं के लिए पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
ये सभी विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध हैं और कक्षा 6 से 12 तक निःशुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान करते हैं। आधुनिक शैक्षणिक भवनों के साथ-साथ बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग पूर्ण सुसज्जित छात्रावासों का निर्माण कराया गया है। प्रत्येक छात्रावास में स्वच्छता, सुरक्षा, शुद्ध पेयजल और पौष्टिक भोजन की उच्चस्तरीय व्यवस्था की गई है, जिससे विद्यार्थियों को घर जैसा सुरक्षित और आत्मीय वातावरण उपलब्ध हो सके।
विद्यालय परिसरों में शिक्षण कार्य को अत्यंत प्रभावी और रोचक बनाने के उद्देश्य से डिजिटल स्मार्ट क्लासरूम, अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब, भौतिकी, रसायन विज्ञान एवं जीव विज्ञान की आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। इसके अतिरिक्त एक समृद्ध पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है, जिसमें पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ-साथ ज्ञानवर्धक संदर्भ ग्रंथ, समाचार पत्र और प्रतियोगी पत्रिकाओं का विशाल संग्रह उपलब्ध है, ताकि विद्यार्थियों की सामान्य जागरूकता और बौद्धिक क्षमता में निरंतर वृद्धि हो सके।
अटल आवासीय विद्यालय योजना की सबसे प्रमुख विशेषता इसका शत-प्रतिशत निःशुल्क एवं सर्वसमावेशी कल्याणकारी स्वरूप है। चयनित विद्यार्थियों को आवास, सत्रानुसार ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग, पाठ्यपुस्तकें, अभ्यास पुस्तिकाएं, लेखन सामग्री तथा संतुलित एवं पौष्टिक भोजन पूरी तरह सरकारी व्यय पर उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और प्राथमिक चिकित्सा देखभाल के लिए पूर्णकालिक प्रबंध किए गए हैं, जिससे निर्धन अभिभावकों पर बच्चों की शिक्षा अथवा जीवन-यापन का तनिक भी वित्तीय बोझ नहीं पड़ता।
शैक्षणिक पाठ्यक्रम के साथ-साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए खेलकूद, शारीरिक व्यायाम, योग, संगीत, चित्रकला, सांस्कृतिक गतिविधियों और जीवन कौशल पर विशेष ध्यान दिया जाता है। परिसरों में विशाल खेल मैदान विकसित किए गए हैं, जहाँ एथलेटिक्स, फुटबॉल, वॉलीबॉल, क्रिकेट तथा विभिन्न इंडोर खेलों की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे जेईई, नीट और एनडीए की प्रारंभिक तैयारी के लिए योग्य शिक्षकों द्वारा विशेष मार्गदर्शन भी प्रदान किया जा रहा है।
योजना के अंतर्गत प्रवेश प्रक्रिया को अत्यंत पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचारमुक्त बनाया गया है। प्रवेश के लिए उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों तथा महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा चिन्हित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के पात्र अनाथ एवं निराश्रित बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है। संपूर्ण प्रदेश में मेरिट आधारित एकसमान प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है, जिसके माध्यम से वास्तविक रूप से पात्र एवं मेधावी बच्चों का चयन सुनिश्चित होता है।
योजना के सफल और सुचारु क्रियान्वयन के लिए प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के समन्वय से एक सुदृढ़ त्रिस्तरीय निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है। विद्यालयों में कार्यरत शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का चयन कड़ी चयन प्रक्रिया और योग्यता के आधार पर किया जाता है, ताकि शिक्षण की गुणवत्ता कॉन्वेंट स्कूलों के समकक्ष बनी रहे। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और मानसिक स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी हेतु अनुभवी वार्डन और योग्य परामर्शदाताओं की नियमित तैनाती की गई है।
परिसर की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए आधुनिक सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम, सुरक्षा प्रहरियों की चौबीसों घंटे तैनाती और बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं, भोजन की गुणवत्ता और पठन-पाठन के स्तर की समीक्षा की जाती है, जिससे व्यवस्था में निरंतर सुधार और जवाबदेही बनी रहे।
जनपद जौनपुर के लाभार्थियों की उपलब्धियां यह प्रमाणित करती हैं कि जब समाज के कमजोर और साधनविहीन तबके को गुणवत्तापूर्ण संसाधन, प्रेरणादायक वातावरण और आधुनिक सुविधाएं बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध कराई जाती हैं, तो वे विकास की मुख्यधारा में अग्रणी भूमिका निभाने में सक्षम होते हैं। ईंट-भट्ठों, निर्माण स्थलों और दैनिक मजदूरी से जुड़े परिवारों के बच्चों का आधुनिक कंप्यूटर चलाना, विज्ञान के प्रोजेक्ट तैयार करना और बोर्ड परीक्षाओं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करना एक बड़े सामाजिक परिवर्तन का संकेत है।