संस्कारित सरकार

पूज्य संत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी की 10 माह की सरकार ने जनसरोकार से जुड कर यह दिखा दिया कि सरकार संस्कार से जुड़ी है। किसानों की परेशानियां कम करने की बात हो या गरीबों को राशन वितरण अथवा सिचाई में सच्चाई दिखने लगी है योगी की सरकार में। योगी सरकार ने वादे के अनुसार पहली कैबिनेट बैठक में किसानों की ऋण माफी कर दी गई। धान की खरीद के लिए सरकार ने कमर कस ली । किसानों का एक-एक दाना धान खरीदा गया। बिचैलिया को बोरी विस्तर बांध कर भागना पड़ा। उचित मूल्य सम्पूर्ण खरीद की गई।

नियत अच्छी हो तो बरकत होती है। अब गरीबों को उनका हक मिले इसके लिए सरकार ने रात-दिन एक कर उनको मदद पहुंचा कर दम लिया। सिचाई में सच्चाई दिखे उसको लेकर मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप विभाग के कबीना मंत्री धर्मपाल सिंह ने कड़ी मेहनत कर विभाग में कर्मठता, ईमानदारी, से कार्य हो, भ्रष्टाचार खत्म हो इस पर दिन रात एक कर काम किया। किसानों की ऋणमाफी, गरीबों को अन्न वितरण तथा सिचांई में सच्चाई पर विस्तार से बात  करते है। रामचरित मानस के रचियता पूज्य गौस्वामी तुलसीदास जी यह चैपाई कितनी सटीक बैठती है सरकार के मुखिया पर ‘‘मुखिया मुंह सो चाहिए, खान-पान कहूॅ एक-पालई-पोसई सकल अंग सहित विवेक‘‘ अर्थात मुखिया को मुख के समान होना चाहिए जो ग्रहण करने को अकेला है परन्तु शरीर के सभी अंगो का विवेक सहित पालन पोषण करता है। पूज्य संत के सम्मुख चुनौतिया मुँह बाय खडी थी। सर्वप्रथम योगी जी ने किसानों की चुनौती को लिया उन्होंने किसानों की कर्जमाफी कर दिखा दिया कि यदि सच्ची निष्ठा है तो कोई भी कार्य असाध्य नहीं है। साहसी मुख्यमंत्री ने 36 हजार करोड़ का ऋण माफ कर दिया। उल्लेखनीय है कि इसके लिए एक नया पैसा सरकार ने ऋण नहीं लिया एक नया पैसा केन्द्र सरकार से मदद नही ली तथा एक भी पैसे का जनता पर कोई टैक्स नही लगाया।
यह कल्याणकारी कदम माननीय मुख्यमंत्री ने अपने खर्च पर यानि सरकार बनने पर जो पैसा बंगलो-गाडियों की खरीद पर अनाब सनाब खर्च किया जाता था उसको रोक दिया और सबसे कह दिया जो प्राप्त है वह पर्याप्त  है। परिणाम हम सबके सामने है। साथ ही साथ मुख्यमंत्री जी ने 30 हजार करोड़ रूपया 7वां वेतन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों को दिया यानि 36$30═ 66 हजार करोड़ रूपया बिना किसी अतिरिक्त मदद के पूरा कर दिखाया। आर्थिक मोर्चे पर सरकार ने अनेक निर्णय लिए और सभी सफल रहे। अब बात गरीबों को खाद्यन बाटने वाले विभाग खाद्य एवं रसद की करे जो स्वयं मुख्यमंत्री जी के पास है। सरकार में राज्यमंत्री के रूप में अतुल गर्ग है। योगी जी ने कहा कि गरीबों को उनका हक हर हाल मे मिलना चाहिए और कर दिखाया कि कैसे सरकार गरीबों के साथ भी खड़ी है। सर्वप्रथम मुख्यमंत्री जी ने राशन कार्डो की जांच कराई तो हैरत अंगेज करने वाली जानकारी सामने आई कि जो राशनकार्ड धारक है वे लाखों की संख्या में दर्ज तो है परन्तु गरीब नहीं है यानि राशन कार्ड खाद्यान के गोल माल करने के लिए बनाए गए है।
गरीबों को मिलने वाला राशन चोरी से नहीं सीना जोरी कर बाजार में बेचा जा रहा था। लखनऊ के गोमतीनगर जो हाई टैक कालोनी है वहां के मकान नम्बर डालकर फर्जी राशनकार्ड बनवा लिए और राशन की बंदर-बांट होती रही। पूज्य संत ने लगभग 5 लाख फर्जी राशनकार्ड पकडे उनको निरस्त किया और जिन लोगो को राशन कार्ड नही मिले थे उनको दिये। अब राशनकार्ड डीलर की बारी थी उनको कहा गया कि आप जो राशन सरकार से लेते है उसका वितरण सही ढंग से कर रहे हो इसकी जानकारी सरकार को निरन्तर उपलब्ध कराये। राशन डीलरों ने बताया कि साहब विभाग के अधिकारियों को यहां तक की कंही कंही तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों को हर माह पैसा पहुंचाना पडता है तब उनकी देखरेख में राशन की बंदरबांट होती है। चैकाने वाले तथ्य सामने आए तुरन्त मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिये कि एक नया पैसा तुमसे अब कोई नहीं ले सकता। राशन दुकानदरों की जांच हुई कुछ के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई। राशन डीलरों के यहां बायोमैट्रिक मशीन लगने लग गई जिससे राशनकार्ड धारक की सही सही पहचान होने लगी। प्रतिवर्ष 12 हजार करोड़ की सब्सिडी खाद् रशद विभाग बांटता है गरीबों को । राज्यमंत्री अतुल गर्ग ने मुझे बताया कि जानकारी के अनुसार पूर्ववर्ती सरकारों में मंत्री के नाम पर विभाग के अधिकारी 10 करोड़ रूपया प्रतिमाह और इतनी ही रकम मुख्यमंत्री के नाम पर भेजते थे या खा जाते थे भागवान मालिक। 10 करोड़$10 करोड़, कुल 20 करोड़  प्रतिमाह 12 महीने में 12ग12त्र 240 करोड़ रूपये और इसकी आड़ में 6 हजार करोड़ के राशन की चोरी खुले आम करते थे। आधा राशन मात्र बटता था। सर्वविदित है राशन की चोरी का अनेको बार पकडा जाना यहां तक की ट्रक-ट्राला ही नहीं पूरी की पूरी ट्रैन बंगलादेश तक भेज दी गई थी। ट्रासपोर्ट का ठेका उठाने वालो की विभाग में पकड इतनी मजबूत थी कि हर बार ठेका उन्ही को ही मिलता था। माफिया गठजोड़ पर कड़ा प्रहार किया गया लेकिन कहावत है जिसके मूंह लहू लगा हो उसको शाकाहारी बनाना आसान कहा है। अब जाकर जब अधिकारियों को लग गया कि योगी जी के राज में चोरी नहीं हो सकती तब जाकर वह कुछ-कुछ सुधरने को तैयार हुए। जिला आपूर्ति अधिकारी से स्पष्ट कह दिया गया कि आप अपना कार्य सही सही करे वरना कठोर कारवही को तैयार रहे। अब बात एक और विभाग सिचांई की करते है। पूर्व की सरकारों में सिचांई विभाग बसपा हो या सपा नोट बटोरने वाला मलाईदार विभाग कहलाता था। नदियों की सफाई कागजों पर हजार करोड़ खर्च कर हो जाती थी। नादियों जस की तस रहती थी। बरसात में नदियों में बाढ आती ही है तो बरसात में बरसात के पानी से सफाई स्वतः हो जाती है और उससे ही नहरों की सफाई हो जाती थी। अब योगी जी की सरकार में यह विभाग मिला भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मपाल सिंह को। श्री सिंह पूर्व में भी भाजपा के मंत्री रह चुके है। लम्बा अनुभव, योगी जी का आर्शीवाद उनके काम आया। धर्मपाल सिंह ने घोषणा कर दी कि इस बार नहरों की सफाई की जांच ड्रोन कैमरो से कराई जाएगी। जिलाधिकारियों की जांच के बाद ही भुगतान होगा। ड्रोन कैमरे की रिपार्ट, डीएम की जांच व ई-टेण्डर प्रणाली का पालन इस प्रकार भ्रष्टाचार को खत्म कर दिखा दिया योगी सरकार ने। टेल तक नहीं खेत तक पानी पहुंचेगा अब इस दिशा में कार्य प्रारम्भ हुआ। 30 वर्ष बाद निगोहा लखनऊ की नहर में पानी जब ग्रामीणों ने देखा तो उन्होंने मिठाई बांटी खुशी के आंसु भी छलके किसानों की आंखों में। सिचाई में सच्चाई 10 माह में देखने को मिली।
पर ड्राप मोर क्राप यानि एक बूंद से अधिक फसल कैसे पैदा हो इस पर सरकार ने लगातार काम किया है। इजराइल पद्धित ‘‘ड्रीप इरिगेशन‘‘ फब्बारे से खेती की शुरूवात हो चुकी है। सर्वप्रथम इसके लिए बुन्देलखण्ड  को चुना गया है। मृत हो गई नहरों को जीवित करने का निर्णय लिया जा चुका है। स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियो तथा मनरेगा के द्वारा प्रदेश के प्रत्येक जनपद में एक नहर को श्रमदान कर जीवित किया जाएगा। लुप्त हो गए जलश्रोतों को खोजकर पानी निकालने पर काम शुरू हो चुका है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी के समय से लाम्बित केन बेतवा समझौता प्रकरण को हल कर लिया गया है। संत है तो परसत्ता से निरन्तर सम्बध तो है ही साथ ही प्रदेश की सत्ता की बागडोर भी सम्भाल रहे है। परमात्मा की कृपा, संत का प्रताप तथा जनता का आर्शीवाद तब मंगल तो होना ही है। उत्तर प्रदेश में अब संस्कार वाली सरकार है यह हम कह सकते है। संत और बसन्त दोनों का आना कल्याणकारी होता है। संत के आने से संस्कृति प्रसन्न होती है और बंसत के आने पर प्रकृति प्रसन्न होती है। पूज्य गौस्वामी तुलसीदास जी की इस चैपाई के साथ लेख की बात समाप्त करते है ‘‘संत उदय सत्त् सुखकारी-जिमि जग सुखद इंदु तमारी यानि जैसे चन्द्रमा और सूर्य का उदय जगत के लिए सदा सुखद है वैसे ही संत का उदय भी हमेशा कल्याण करता है।
(नरेन्द्र सिंह राणा)
प्रदेश प्रवक्ता भाजपा

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